दिवाली पूजा विधि, मुहूर्त, समय एवं लक्ष्मि गणेश की आरती

दीपावली पर अमावस्या के दिन के दौरान, यह महत्वपूर्ण है अपने घर के मंदिर या प्रमुख स्थान (लॉकर या रसोई) में भगवान गणेश और श्री लक्ष्मी जी के नए आदर्शों को स्थापित करके उनकी पूजा करी जाए।अन्य दीवाली रस्में जो बहुत महत्वपूर्ण हे



  1. लक्ष्मी-गणेश की पूजा
  2. कुबेर पूजा
  3. बाहिया-खाता पूजा [हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार खातों की पुस्तकों को बंद करने के लिए]

अनुष्ठानों के अनुसार, निम्नलिखित प्रकार की गतिविधियां को दिवाली पूजा विधि के रूप में किया जाना चाहिए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्मी गणेश पूजा, संकल्प और कुबेर पूजा मानी जाती हे ।

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दिवाली पूजा विधि, मुहूर्त, समय एवं लक्ष्मि गणेश की आरती

दीवाली पूजा हेतु पूजन सामग्री

दीवाली पूजा के सामान की लगभग सभी चीजें घर में ही मिल जाती हैं। कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत (जनेऊ), श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, देवताओं के प्रसाद हेतु मिष्ठान्न (बिना वर्क का)

दिवाली के दिन निम्न कार्यक्रमो को विशेष महत्व दिया गया हे 

  1. आत्म-शोधन – जो आत्म शुद्धि के रूप में जाना जाता है।
  2. सङ्कल्प- जो पवित्र व्रत है दीवाली पूजा का अनुष्ठान करने के लिए ।
  3. शान्ति-पाठ – शांति पथ मंत्र हर किसी के जीवन में शांति, खुशहाली और समृद्धि लाने के लिए है।
  4. मङ्गल-पाठ – जो हर किसी के जीवन में इच्छाओं को पूरा करने के लिए है।
  5. कलश-स्थापन – विस्तृत कलश स्थापना की पूजा विधि
  6. गणपति पूजा – पांच चरणों गणेश पूजन विधि
  7. नव-ग्रह पूजा – नवग्रह पूजन
  8. षोडश मातृका-पूजा
  9. भगवान गणेश की नवीन मूर्ति की पूजा – श्री गणेश की पूजा
  10. श्रीलक्ष्मी की नवीन मूर्ति की पूजा – श्री लक्ष्मी की पूजा
  11. लेखनी-दावात पर महा-काली पूजा – पर महा-काली पूजन
  12. बही-खाते पर सरस्वती पूजा –
  13. तिजोरी-बक्से पर श्रीकुबेर पूजा – श्री कुबेर-पूजा पर तिजोरी-बक्सा
  14. दीप-मालिका पूजा- गहरे मलिका पूजन विधि के लिए सभी आवश्यक कदम पूजा
  15. विसर्जन – प्रार्थना के साथ दीवाली पूजा की औपचारिक निष्कर्ष

दिवाली मुहूर्त

किसी भी परिदृश्य में, लक्ष्मी पूजा अक्टूबर की 30 तारीख को प्रदोष काल मुहूर्त के समाप्त होने से पहले किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, दीपावली पूजन प्रदोष काल पर सूर्यास्त के बाद शुरू होता है।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = 17:34 से 19:24
समयकाल = 1 घंटा 50 मिनट
प्रदोष काल = 16:44 से 19:24
वृषभ काल = 17:34 से 19:25

दीवाली की पूजा विधि

दीवाली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर निम्न मंत्र पढ़ते हुए छिड़कें। बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।

ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।

इसके बाद मां पृथ्वी को प्रणाम करके निम्न मंत्र बोलें तथा उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने आसन पर विराजमान हों

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः

इसके बाद “ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः” कहते हुए गंगाजल का आचमन करें

ध्यान व संकल्प विधि

इस पूरी प्रक्रिया के बाद मन को शांत कर आंखें बंद करें तथा मां को मन ही मन प्रणाम करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प करें। संकल्प के लिए हाथ में अक्षत (चावल), पुष्प और जल ले लीजिए। साथ में एक रूपए (या यथासंभव धन) का सिक्का भी ले लें। इन सब को हाथ में लेकर संकल्प करें कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेशजी की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।

इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। तत्पश्चात कलश पूजन करें फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन के बाद 16 मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। पूरी प्रक्रिया मौलि लेकर गणपति, माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें। अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं। इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।

मां को प्रभावित करने के लिए करें श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त व कनकधारा स्रोत का पाठ

सबसे पहले भगवान गणेशजी, लक्ष्मीजी का पूजन करें। उनकी प्रतिमा के आगे 7, 11 अथवा 21 दीपक जलाएं तथा मां को श्रृंगार सामग्री अर्पण करें। मां को भोग लगा कर उनकी आरती करें। श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त व कनकधारा स्रोत का पाठ करें। इस तरह से आपकी पूजा पूर्ण होती है।

क्षमा-प्रार्थना करें

पूजा पूर्ण होने के बाद मां से जाने-अनजाने हुए सभी भूलों के लिए क्षमा-प्रार्थना करें। उन्हें कहें-

मां न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे आप भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एक दंत दयावंत चार भुजाधारी।

माथे पर तिलक सोहे, मुसे की सवारी।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डुवन का भोग लगे, संत करे सेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़ियन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।

सुर श्याम शरण आये सफल कीजे सेवा।। जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

लक्ष्मीजी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता

सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

दुर्गारूप निरंजन, सुख संपत्ति दाता

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता

कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद्गुण आता

सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता

खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

शुभ गुण मंदिर, सुंदर क्षीरनिधि जाता

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता

उर आंनद समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

स्थिर चर जगत बचावै, कर्म प्रेर ल्याता

तेरा भगत मैया जी की शुभ दृष्टि पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता….

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…

लक्ष्मि पूजन की समाप्ति के अनुरूप आप मिठाई बॉट सकते हे 

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